शायद हमारे बीच रावण
आज भी पल रहा है,
तभी तो उसका पुतला
आज भी जल रहा है,
फैला है दसो दिशाओं में
उसका सिर,तभी तो,
आज विभीषण का न होना
हम सब को खल रहा है।
आखिर कौन है ये रावण
जिसे प्रतिवर्ष जलाया जाता है,
फिर भी,दिन प्रतिदिन
इसका कद और बढ़ता जाता है।
आज अपने ही हाथों
हमारी अपनी लाज है
क्योंकी,अब यहाँ हर ओर
रावणी वृत्ति का राज है ।
आशातुर है हर एक दृष्टि
कब लेगा कल्कि अवतार,
और, कर डालेगा
इस रावण का संहार ।।
सुनीता 'सुमन'
"पत्थर का दर्द"
आज भी पल रहा है,
तभी तो उसका पुतला
आज भी जल रहा है,
फैला है दसो दिशाओं में
उसका सिर,तभी तो,
आज विभीषण का न होना
हम सब को खल रहा है।
आखिर कौन है ये रावण
जिसे प्रतिवर्ष जलाया जाता है,
फिर भी,दिन प्रतिदिन
इसका कद और बढ़ता जाता है।
आज अपने ही हाथों
हमारी अपनी लाज है
क्योंकी,अब यहाँ हर ओर
रावणी वृत्ति का राज है ।
आशातुर है हर एक दृष्टि
कब लेगा कल्कि अवतार,
और, कर डालेगा
इस रावण का संहार ।।
सुनीता 'सुमन'
"पत्थर का दर्द"