Monday, 15 August 2011

आज़ादी

आज़ादी किसे अच्छी नहीं लगती है ?
आज़ाद हर कोई होना चाहता है।
बेटे-बेटियां..........
अपने माँ-बाप की पाबंदियों से
औरतें अपने घर की दहलीज से
और मर्द अपनी जिम्मेदारियों से आज़ाद होना चाहता है
आज़ादी किसे अच्छी नहीं लगती
आज़ाद हर कोई होना चाहता है
कुर्सी अपने अनचाहे बोझ से
नेता पंचवर्षीय चुनावों से
भ्रष्टाचारी कानूनी दाव पेचों से
और कानून..........
अपनी धाराओं से
आज़ाद हो जाना चाहता है।
आज़ादी किसे अच्छी नहीं लगती
आज़ाद हर कोई होना चाहता है।
              सुनीता "सुमन"
              "पत्थर का दर्द"

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