हम सुनाते रहे हमेशा
अपनी ही कहानी
अपने ही दिल को,
नीरवता जब छाई तो
चाँदनी में खड़े हुए
ताकते ही रहे हम
अपनी परछाई को,
नीरसता सी रही
जीवन में सदा
हम पाटते ही रहे
निःशब्दता की खाई को,
मंजिल तक पहुंचे
साथ अकेलेपन के
कब्र में पड़े हुए
ताकते ही रहे
हम अपनी तनहाई को ।
सुनीता 'सुमन'
"पत्थर का दर्द"
अपनी ही कहानी
अपने ही दिल को,
नीरवता जब छाई तो
चाँदनी में खड़े हुए
ताकते ही रहे हम
अपनी परछाई को,
नीरसता सी रही
जीवन में सदा
हम पाटते ही रहे
निःशब्दता की खाई को,
मंजिल तक पहुंचे
साथ अकेलेपन के
कब्र में पड़े हुए
ताकते ही रहे
हम अपनी तनहाई को ।
सुनीता 'सुमन'
"पत्थर का दर्द"
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