Thursday, 19 April 2012

सवाल २


अपने सपने अपने अरमानो को रख के ताख पे हम चुपचाप निकल जाते हैं,
फिर फिर न जाने क्यूँ हम ही बेरहम जमाने के निशाने पे आ जाते हैं !

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