यहाँ हर बज़्म हर जज़्बात को बिकते देखा
ग़मे दिल ग़मे हालात पर मिटते देखा,
देख लिया इतना कि कोई तमन्ना न रही
वक़्त पड़ते ही अपने साये को सिमटते देखा,
कौन कहता है यहाँ रिशते बनाए जाते है
यह वो दुनियाँ है जहाँ रिशतों को बिखरते देखा,
चंद लम्हे को सभी अपने बनते हैं मगर
साथ जीने वालों को साथ न मरते देखा,
हम खुशनसीब रहे हमें प्यार तो नसीब रहा
प्यार कि दुनियाँ को पलकों में उजड़ता देखा,
हमने कुछ देर की गुलशन में बहारें देखी
एक झोंके से यहाँ बागों को उजड़ते देखा।।
-पत्थर का दर्द
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