Tuesday, 15 March 2011

मेरी अभिलाषा

एक दिन......
मेरी उपासना से प्रसन्न हो
प्रभु मेरे सपने में आए और पूछा,
बता तेरी ख्वाहिस क्या है?
मैंने कहा......
प्रभु मुझे दीये की लौ मत बनाना
और मुझे मोमबत्ती की तरह भी मत जलाना
इस तरह मैं
सारी दुनिया को रौशनी तो दे सकूँगी
पर मेरा अस्तित्व जल जाएगा,
या फिर मोमबत्ती की तरह पिघल जाएगा,
फिर इस दुनियाँ को राह कौन दिखाएगा?
मेरा अस्तित्व तो खोकर रह जाएगा!
प्रभु परेशान!
अंततः पूछा-फिर?
मैंने कहा......
प्रभु मुझे छिपकिली बना दो|
प्रभु हतप्रभ
बोले सोच लो......
मैंने बार-बार सोचा,
हज़ारों बार सोचा
और विचारा करोड़ों बार|
अंततः मैंने कहा......
प्रभु मुझे छिपकिली ही बना दो,
इस तरह मैं
सरे कीड़े-मकौड़े को चाट कर जाऊँगी
और......
एक स्वच्छ वातावरण बनाऊँगी|
                               -पत्थर का दर्द

Monday, 14 March 2011

मेरा पड़ोसी

मेरा पड़ोसी वह दीर्घायु
शीतलता का अम्बार,
अक्सर कह जाता है मुझसे बहुत कुछ
वह पीपल का अधेड़ वृक्ष |
जब भी चलती है बासंती बयार ,
अपनों से छूटने की
व्यथा का करता है मूक इकरार |
और ......................
नव किसलय दल का
बाहें पसार,
हुलस कर करता है नित्य इंतजार |
जेठ-बैशाख में तप कर ,
अब भी बचे हैं कुछ रूखे से ,
कुछ सूखे से पत्ते |
जिन्हें शायद इंतजार है .................
सावन भादो की ,
कि, फूहारें भर देंगी नवजीवन ,
उसके भी मुरझाय यौवन में
किन्तु क्या पता !
उन्हें भी ...................
प्रकृति के भावसिक्त होना पड़ेगा ,
नव-किसलय-दल हेतु
उन्हें भी रिक्त होना पड़ेगा |
ऐसे ही छिपे उस पीपल में असंख्य अर्थ है
वर्ना तो जीवन खाली है , व्यर्थ है |||

                                     -"पत्थर का दर्द"

Friday, 11 March 2011

एक सूखा हुआ फूल

हवा के एक झोंके से
महक उठती थी दिशाएँ
तितलियों के प्यार से
खिल उठता था
जिसका मन
और, भौरों को
पास बुला
छुपा लेती थी
खुद में उसका तन,
कभी देवों के सर पे
चढ़ इठलाती थी
कभी,
प्रगाढ़ प्रेम की
बनती थी निशानी
आज असके सर पे
लगी है रस्ते की धूल
क्या होगा उसका अस्तित्व
वो तो है
एक सूखा हुआ फूल |

Thursday, 10 March 2011

Sunita Suman

Hi Everybody,
          I am Sunita Suman,  I am a Poetess by profession. I have wrote a poetry collection book named "पत्थर का दर्द" . My husband is Taxiation Consultant by profession . His name is Satyendra Kumar Verma. I have a 14 years son named Shivansh Verma, studing in D.P.S. Ghaziabad Vasundhara.