Friday, 28 December 2012
Thursday, 27 December 2012
Saturday, 22 December 2012
दिलवालों की दिल्ली
दिलवालों की दिल्ली में दिल का कोई मोल नहीं,
खाते हैं सब शक्कर भी पर मीठे इनके बोल नहीं .....
खाते हैं सब शक्कर भी पर मीठे इनके बोल नहीं .....
तलबगार
कहने को सबने कह दिया इंसानियत शर्मसार है, क्या इसके लिए हमारा परिवेश हीं नहीं जिम्मेदार है, नज़र उठा के देखिएहर आदमी हवश का शिकार है
आज का हर इंसान इंसानियत का तलबगार है........
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