चलो मिलके मेरे बन्धु
हम नया एक साज बनाएँ,
देश प्रेम का राग छेड़कर
एकजुट हो गुनगुनाएँ,
न हो कोई भेद-भाव
ऊँच नीच का भेद मिटाएँ,
निरक्षता के कलंक धो
अक्षर को अक्षर से मिलाएँ,
जननी हमारी जन्मभूमि है
इस पर अपनी जन लुटाएँ,
देश-प्रेम का दीप जलाकर
आगे ही आगे बढ़ते जाएँ ।।
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