मैंने देखा है
हाट में बिकते........
पिंज़ड़े में बंद
तोते को !
और लोगों को,
मोल भाव करते हुए
और फिर
अपने घर के
अहाते में
टांगते हुए ।
मैंने देखा
गणेश जी को
मंदिरनुमा पिंजड़े में
बंद कर
सुनहरे कलेवर से सजाकर
हाट में बिकते हुए,
लोग उन्हें भी
मोल भाव कर
खरीद लाते हैं,
अपने घर के
प्रवेश द्वार पर टांगने के लिए ।
इस आस में की,
साथ गणेश के
लक्ष्मी भी चली आयें
शायद.......
दाहिनी ओर विराजने के लिए
या,...शायद,.....
अपने घर
शुभ,
शांति और
संपदा,
लाने के लिए ।
आजकल हर भाव में बिकते हैं
गणेश !!
असमर्थों के लिए महज़ दस रुपय में,
और समर्थों के लिए............
सहज सौ रुपय में,
किन्तु,
आज-कल हर घर में
सहज उपलब्ध हैं गणेश
अदृश्य रूप में
लक्ष्मी के साथ
या फिर,
शुभ,
शांति और
अदृश्य संपदा के साथ ।।
सुनीता 'सुमन'
"पत्थर का दर्द"
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